बलात्कार मानव सभ्यता के विकास के दावों को झूठा ठहरता है और मानव गरिमा को लगातार चोट करता रहता है यह अपने स्वरुप में घृणित है ही साथ हि यह अपने स्वाभाव में बहुत घिनौना है जिसमे पीड़िता को कई समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
बलात्कार सिर्फ शारीरिक बल द्वारा यौन दुराचार नहीं लेकिन इसका दायरा बहुत बड़ा है जो अपने में उन तमाम यौन शोषणों को समेटे हुए है जो कीसी भी कारण या दबाव में किये जाते है जिसमे परिस्थितिया और तरीके भिन्न भिन्न होए है। उदाहरण के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य या शहर में हुई बलात्कार की घटना अलग होती है ठीक इसी तरह पिता , चाचा , मामा ,रिश्तेदार या पडोसी द्वारा किया गया कु-कृत्य एक अलग समाज की मांग करता है साथ ही इसमे तृतीय लिंगो और पशुओ के लिए कोई सुनवाई नहीं होती है।
यहाँ हम दूसरे स्तर की चर्चा करने की कोशिश करेंगे जहा बलात्कार का स्वरूप बदलता दिखा देता है जो शरीर द्वारा नहीं बल्कि गालियों के माध्यम से मुख(Mouth) द्वारा किया जाता है, किसी परिवार, समूह या फिर व्यक्ति विशेष को निचा दिखने क लिए किया जाता है या हसी मजाक को माध्यम बनाकर औरत के अंगो कि सार्वजनिक रूप से चर्चा करके अपनी मौखिक और मानसिक कुंठा को दबाने का प्रयास किया जाता है।
गालिया आम तौर पर दुसरो की माँ और बहन/प्रियजनो का बलात्कार करने की धमकिया ही होती है क्युकी किसी की माँ जो लगभग अधेड़ उम्र की हो गयी है उसके प्रति यौन आकर्षण तो इसका कारण कभी भी नहीं हो सकता है फिर सवाल उठता है की ऐसी गालियों को इतना महत्व क्यों ? ऐसी गालिया कैसी सामाजिक व्यवस्था की ओर इशारा करती है ?और क्या हमें अपनी संस्कृति पर इसे कलंक की तरह देखना चाहिए ?
इसकी चर्चा जीतनी आसान है उत्तर उतना आसान नहीं हो सकता परन्तु यहाँ कहना ठीक ही होगा के हमारे समाज में यौन शुचिता/ योनि को घर की इज्जत का प्रतीक बनाकर उसे समाज द्वारा लइसेंस प्रदान किया गया है ऐसे में किसी के घर /परिवार या व्यक्ति विशेष की इज्जत को तार तार करना हो तो मौखिक बलात्कार एक सरल उपाय मन जाता है जो गालियों क माध्यम से किया जाता है ऐसे में बलात्कार सिर्फ शारीरिक उत्पीड़न या यौन क्रियाओ तक सिमित नाहि रह जाता है बल्कि दमन करने , निचा दिखाने और जलील करने का सस्ता और सरल साधन बन जाता है जिसे समाज के द्वारा मान्यता प्राप्त है।
सामान्यतः कारणों का विश्लेषण करने की कोशिश की जाये तो प्राथमिकतः इसके मूल में हम परवरिश को जिम्मेदार ठहरा सकते है उदाहरण के तौर पर किसी घर में औरतो के साथ ग़ुलाम की तरह व्यव्हार किया जाता है तो पीढ़ी की मासिकता कुंध हो जाती है और अगली पीढ़ी भी अपनी पत्नी के रूप में गुलाम की खोज करने लगती है जो अपने घर की स्त्रियों की आजादी छिन लेते है और उनका इस्तेमाल अपने हित के लिए करने लगते है जैसे कोई वास्तु उनके हाथ लग गयी हो, परिणाम ये सामने आते है अधिकांश बलात्कार की घटनाये परिवार् में या जान पहचान के लोगो में देखि जाती है जो एक यौन तनाव के अप्रत्यक्ष प्रभाव के कारण एक लम्बी योजना का पारिणाम होता है जिसमे अधिकांश मामले कभी सामने नहीं आ पाते है क्योकि ऐसे मामलो को परिवारिक/ सामाजिक मान्यता मिल जाती है क्युकी पीड़िता को बेघर होने का डर दिखा कर उसके ऊपर मामलो को दबाने का दबाव बनाया जाता है।
लड़कियों और औरतो के अंगो को गालियों के माध्यम से उपयोग में लाना ही मौखिक बलात्कार है,अब यह फैशन बन गया है और समाज भी इसे मान्यता प्रदान करते रहता है क्युकी हमारे समाज की परवरिश की प्रक्रिया लिंग भेद के मूल्यों पर टिकी हुई दिखाई देती है जिसके कारण बचपन से यौन आक्रामकता पनपने लगती है और यही बच्चे बड़े होकर सरेआम स्त्रियों के जननांघो/बॉडी ऑर्गन्स की सार्वजनिक चर्चा करते हुए गर्व महसूस करने लगते है ऐसे मे कहा जा सकता है के अब मौखिक बलात्कार (गालिया) हमारे समाज में ऐसी महामारी की तरह फ़ैल गया है जिसकी न तो कोई वैक्सीन उपलब्ध है न ही इसके इलाज की खोज समाज द्वारा की जा रही है ।
” लड़कियों/बेटियों की जिंदगी का सबसे बड़ा जुआ यही होता है के उन्हें कैसा परिवार और पति मिलेगा । “
"हमारा समाज स्त्री कि पवित्रता उसके शरीर से तय करता है मन से नहीं ।"

Location:
82 Main St. Brooklyn, NY
Date:
October 24, 2021
Good thoughts present by you..your thought highlights the abused language (private parts of women) used in the society just as causally like they get license to used in their communication.Very crucial thing you highlight.👍
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